IFPRI Global Food Policy Report 2013

canwefeedtheworld's avatarOne Billion Hungry: Can We Feed the World?

WAB_GFPR_2013_370x82_org Launched this week, the International Food Policy Research Institute (IFPRI) Global Food Policy Report 2013 sets out past developments and future directions in tackling hunger and malnutrition. 2014 is an important year for food and nutrition security as the final efforts towards reaching the Millennium Development Goals and the development of the post-2015 agenda are put into action.

Progress towards achieving the Millennium Development Goals has been mixed. Globally we are on track to halve poverty, increase access to drinking water and reduce the incidence of malaria and tuberculosis but those goals relating to hunger, child mortality, access to primary education, reproductive healthcare and sanitation largely remain beyond our reach. The Sustainable Development Goals will, however, propose targets even more ambitious: eliminating hunger by 2025, for example. They will also be expanded in scope, as discussed at the 2012 UN Conference on Sustainable Development in Rio de Janeiro, to cover…

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भारत के भौतिक विभाग

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 इस मानचित्र में भारत के भौतिक विभागों को प्रदर्षित किया गया है

1-         प्रथम भाग में देष का पर्वतीय भाग दर्षाया किया गया है

जो हिमालय प्रदेश है, इस भाग को चार उपविभागों में विभाजित किया गया है, 1 अ में हिमाचल प्रदेष हिमाचल, 1 व में उत्तरांचल हिमालय, 1 स में नेपाल या मध्य हिमालय और 1 द में असम हिमालय दिखाया गया है.

1 अ-यह सिन्धु नदी से सतलज नदी तक 570 किलो-मीटर लम्बार्इ में विस्तृत है, इसका क्षेत्रफल 45000 वर्ग किलोमीटर है, इस भाग में हिमालय की टाटाकुटी और ब्रह्मासकल चोटियाँ स्थित हैं तथा पीर पंजाल, छोटागली, नुरयूर, चोरगली, जामीर, बनीहाल, रोहतांग, बडालापचा, गुलाबधर, जोजीला और बुर्जिल दर्रे हैं.

1 यह सतलज नदी से काली नदी तक 320 किलोमीटर लम्बार्इ में विस्तृत है. इस भाग में हिमालय की बद्रीनाथ, केदारनाथ, त्रि“ाूल, माना गंगोत्री, नन्दादेवी कामेत, जाओनली, नन्दाकोट, गंगोत्री और षिवलिंग चोटियाँ स्थित हैं, गंगा (भगीरथी) और यमुना नदियों का उद्गम भी इसी क्षेत्र से है.

       1 यह काली नदी व तिस्ता के मध्य 800 किलोमीटर लम्बार्इ में फैला हुआ है, इसका कुल क्षेत्रफल 116800 वर्ग किलोमीटर है, इसकी औसत ऊँचार्इ 6250 मीटर है. इस भाग में सिक्किम हिमालय, दार्जिलिंग हिमालय और भूटान हिमालय “ाामिल हैं, इस भाग की सबसे उँची चोटियाँ, एवरेस्ट, कंचनजंधा अन्नपूर्णा प्, धौलागिरि गोसार्इथान, चोचू, मकालू आदि स्थित हैं.

       1 यह तिस्ता नदी से ब्रह्मपुत्र नदी तक 750 किलोमीटर की लम्बार्इ में विस्तृत है. इसका क्षेत्रफल 67500 वर्ग किलोमीटर है. इस श्रेणी का ढाल मैदान की ओर बड़ा तेज है. किन्तु पष्चिम की ओर क्रमष: धीमा होता गया है. इसकी प्रमुख चोटियाँ कुला, कांगड़ी, चुमलहाटी, काबरू, जाग सांगला आदि है।

2-         द्वितीय भाग में गंगासतलज का मैदान प्रदर्षित किया गया है

यह मैदान पूर्व में 145 किलोमीटर से लगाकर पष्चिम में 480 किलोमीटर चौड़ा है तथा 2414 मिलोमीटर की लम्बार्इ में धनुश आकार में विस्तृत है, श्ह मैदान सतलज, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाकर जमा की गर्इ काँन मिट्टी से निर्मित है. यह अत्यन्त उपजाऊ मैदान है. इस मैदान का ढाल समतल है, अत: ऊँचे भाग बहुत ही कम हैं. इस भाग में उत्तरी व पष्चिमी राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेष, बिहार, उड़ीसा, पष्चिम बंगाल और असम का आधा भाग सम्मिलित है. इसके दो भाग हैं-(1) पष्चिमी मैदान और (2) पूर्वी मैदान.

पष्चिमी मैदान पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान में फैला हुआ है. इस भाग में सतलज, व्यास और रावी नदियाँ बहती हैं. इस भाग में मिट्टी के उभरे हुए टीले (दंडे) अधिक पाए जाते हैं. कहीं-कहीं इन टीलों के मध्य निम्न भूमि भी मिलती है. यह मैदान अधिकतर “ाुश्क और विशम जलवायु वाला है. इस मैदान का सुदूर पष्चिमी भाग धार का मरूस्थल है. यह 644 किलोमीटर लम्बा और 360 किलोमीटर चौड़ा है, यहाँ रेत के टीले स्थित हैं. बालू के इन टीलों की ऊँचार्इ 120 से 150 मीटर तक है. अधिकांष टीले 3 से 5 किलोमीटर लम्बे और 15 से 18 मीटर तक ऊँचे है.

पूर्वी मैदान उत्तर प्रदेष, बिहार, झारखण्ड और पष्चिम बंगाल तक विस्तृत है. इससे गंगा व उसकी सहायक नदियों द्वारा लार्इ बारीक काँप मिट्टी की तहें जमती रहती हैं. इसमें दोआब क्षेत्र, रूहेलखण्ड का मैदान, अवध का मैदान, गोमती का मैदान, उत्तरी बिहार का मैदान, झारखण्ड का मैदान, उत्तरी बंगाल का मैदान तथा गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी का डेल्टा “ाामिल है. गंगा के डेल्टा के उत्तर पूर्व में ब्रह्मपुत्र का पैदान विस्तृत है. यह गारो और हिमालय पहाड़ के मध्य में एक लम्बा और संकरी पट्टीनुमा मैदान है.

 3-         तृतीय भाग में प्रायद्वीपीय पठार को दर्षाया गया है

सतलज और गंगा के दक्षिण में विस्तृत है. यह राजस्थान से कुमारी अन्तरीप तक 1700 किलोमीटर लम्बार्इ में और गुजरात से पष्चिम बंगाल तक 1400 किलोमीटर चौड़ार्इ में विस्तृत है. इसका आकार त्रिभुजाकार है जिसका चौड़ा भाग उत्तर की ओर और संकरा भाग दक्षिण की ओर है. पठार में उत्तर में अरावली, विन्ध्याचल और सतपुड़ा की पहाड़ियाँ हैं. इस प्रायद्वीप की औसत ऊँचार्इ 487 से 762 मीटर तक है. इसका क्षेत्रफल 7 लाख वर्ग किलोमीटर है. प्रायद्वीप के अन्तर्गत दक्षिणाी-पूर्वी राजस्थान, मध्य प्रदेष, झारखण्ड, महाराश्ट्र, उड़ीसा, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेष का पष्चिमी भाग, तमिलनाडु आदि राज्य “ाामिल हैं. प्रायद्वीप भारत की प्राचीनतम कठोर चट्टानों का बना वह भूभाग है जिसका क्षरण मौसमी क्षति की क्रियाओं द्वारा होता रहा है.

 प्रायद्वीपपीय पठार में अरावली की पहाड़ियाँ, विन्ध्याचल, मालवा का पठार, बधेलखण्ड का पठार, नर्मदा-ताप्ती की घाटियाँ, महादेव, मैकाल, कैमूर, बाराकर और राजमहल की पहाड़ियाँ, भण्डार पठार, रीवा पठार में हजारीबाग का पठार; कोडरमा का पठार, रांची का पठार, तथा राजमहल, पारसनाथ, डालमा और पोराहाट श्रेणियाँ मुख्य हैं.

 4-         चतुर्थ भाग में तटीय मैदान दिखाया गया है

 दक्षिण पठार के पूर्व और पष्चिम की ओर पूर्वी तथा पष्चिमी घाट और समुद्र के बीच में समुद्रतटीय मैदान स्थित है. पष्चिम की ओर पष्चिमी समुद्रतटीय मैदान और पूर्व की ओर पूर्वी तटीय मैदान है. पष्चिमी मैदान के अन्तर्गत गुजरात का मैदान, कोंकण का तटीय मैदान, मालावार का तटीय मैदान, केरल का तटीय मैदान स्थित है. पूर्वी मैदान के अन्तर्गत उत्कल का मैदान, आन्ध्र का मैदान, तमिलनाडु का मैदान आदि सम्मिलित हैं.

 स्रोत: मानचित्र अध्ययन भूगोल,उपकार प्रकाशन, डा. सी एल खन्ना एवं डा.एस पी सिंह

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Sankalp Patra – A written Assurance from Political Parties

terraurban's avatarTerra Urban टेरा अर्बन

As on one side political parties are busy in the preparation of  2014 loksabha elections, at the same time on the other side, we the members of Civil Society organizations are also visioning this elections period as a first-rate & lucrative  opportunities  to stimulate & encourage the common people to put their demand before the political parties. In this tune PRIA through FIUPW forum at National level & through intervention in 11 states of the country along with local partners organization running PEPAC campaign to bring the issues of Urban poverty as a main concern for the political parties and making efforts for  placing  it as a separate agenda in their political manifesto. In this regard in alliance with our partner in different state we are organizing State & Commissionare level consultation on “Urban poverty & urban governance”for putting the urban poverty on political agenda & highlighting the issues pertaining…

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दक्षिण पूर्व एशिया (SouthEast Asia)

दक्षिण पूर्व एशिया या दक्षिण एशिया, एशिया  का एक उपप्रदेश है जो भौगोलिक रूप से चीन के दक्षिण के देशों,  भारत के पूर्वी न्यू गिनी  के पश्चिमी, ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी देशों से मिलकर बनता है .

यह क्षेत्र  भूगर्भीय प्लेटो के चौराहे पर स्थितं  है। इस कारण

यहाँ  भूकंप और भारी ज्वालामुखी गतिविधि  पायी जाती है।

दक्षिण पूर्व एशिया के दो मुख्य भौगोलिक क्षेत्र  हैं:

मुख्यभूमि :, इंडोचीन के रूप में भी जाना जाता है, जिसमें कंबोडिया , लाओस , म्यांमार ( बर्मा ), थाईलैंड , और वियतनाम हैं ।

समुद्री दक्षिण पूर्व एशिया  जिसमें शामिल हैं, ब्रुनेई , मलेशिया , पूर्वी तिमोर , इंडोनेशिया , फिलीपींस , और सिंगापुर .

दक्षिण पूर्व एशिया  प्रमुख धर्म हैं बौद्ध धर्म , ताओ धर्म , इस्लाम , ईसाइयत .  हालांकि, धर्मों की एक विस्तृत विविधता क्षेत्र भर में पाई जाती है। हिंदू धर्म और कई अनिमिस्टिक प्रभावित प्रथाओं वाले धर्म भी पाये जाते हैं।

देश

  • ब्रुनेई
  • पोरवी तिमोर
  • कंबोडिया
  • इंडोनेशिया
  • लाओस
  • मलेशिया
  • म्यांमार
  • फिल्लीपाइन्स
  • सिंगापुर
  • थायलैंड
  • वियतनाम

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