नए वर्ष के आगमन पर..(कँवल भारती)

Hillele

Colorful-balloons-to-make-you-happy-teddybear64-16736094-1024-1280

नया वर्ष तू क्या लेकर आया है?

आशाएं विश्वास हमें तो करना ही है

क्यों न करेंगे? करते ही आये हैं.

वांच रहे हैं लोग राशियाँ राशिफल में

कुछ के चेहरे मुरझाये हैं,

कुछ के फिर भी खिले हुए हैं.

आँखों देखा नहीं समझते, कागद लेखे सीस नवाते.

पता नहीं क्यों विसराते हम इस यथार्थ को

वृक्ष बबूल का बोएँगे तो आम कहाँ पाएंगे?

बोएँगे नफरत जग में तो प्यार कहाँ पाएंगे?

बिरलाओं के लिए उजड़ते रहे झोंपड़े ज्यों ही,

क्या रोक पाएंगे कदम बगावत के हम?

शायद सत्ता का चरित्र ही यह है

धरती खाली हो गरीब से जल्दी,

कुछ का करें सफाया बागी, कुछ का सेना.

नए वर्ष में लगता है अब ये ही होना.

सीमित दंगे राष्ट्रवाद के फल देवेंगे कारपोरेट को,

हम आपस में सिर फोड़ेंगे, वे ‘सुधार’ को तेज करेंगे.

हम खेलेंगे जाति-धर्म के अंगारों से,

वे लूटेंगे सकल पदारथ जो भू-माहीं.

नए वर्ष में…

View original post 94 more words

Advertisements

About Rashid Faridi

I am Rashid Aziz Faridi ,Writer, Teacher and a Voracious Reader.
This entry was posted in Uncategorized. Bookmark the permalink.

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s